हिंद महासागर का बदलता संतुलन: 60 साल में खारापन 30% तक घटा

दशकों तक हिंद महासागर पृथ्वी के सबसे अधिक खारे समुद्री क्षेत्रों में गिना जाता रहा, लेकिन अब इसमें बदलाव के संकेत दिख रहे हैं। खासकर दक्षिणी हिंद महासागर के कुछ हिस्सों में लवणता तेजी से घट रही है। कोलोराडो यूनिवर्सिटी के एक नए अध्ययन में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है।

अध्ययन के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के पश्चिमी तट से दूर दक्षिणी हिंद महासागर में पिछले लगभग 60 वर्षों के दौरान खारापन करीब 30 प्रतिशत तक कम हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह बदलाव समुद्री धाराओं, जलवायु प्रणाली, वर्षा चक्र और समुद्री पारिस्थितिकी पर गहरा असर डाल सकता है।

शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर मॉडलिंग के जरिए पाया कि इस गिरावट के पीछे जलवायु परिवर्तन प्रमुख कारण है। ग्लोबल वार्मिंग हिंद महासागर और उष्णकटिबंधीय प्रशांत क्षेत्र के ऊपर बहने वाली सतही हवाओं को प्रभावित कर रही है, जिससे समुद्री धाराओं की दिशा बदल रही है और मीठे पानी का अधिक प्रवाह दक्षिणी हिस्सों की ओर पहुंच रहा है। लवणता कम होने से समुद्री जल का घनत्व भी घटता है, जो समुद्री गतिशीलता को प्रभावित करता है।

भारत के संदर्भ में यह बदलाव अहम माना जा रहा है क्योंकि हिंद महासागर की स्थिति सीधे मानसून, वर्षा पैटर्न, मत्स्य संसाधनों और तटीय मौसम को प्रभावित करती है। वैश्विक स्तर पर बदली हुई समुद्री धाराएं यूरोप, एशिया और अफ्रीका के तापमान संतुलन पर भी असर डाल सकती हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि महासागर आपस में जुड़े होते हैं, इसलिए किसी एक क्षेत्र में बदलाव दूर-दराज तक प्रभाव डाल सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार लवणता में गिरावट से महासागर और वायुमंडल के बीच की परस्पर क्रिया प्रभावित हो सकती है और प्रमुख ओशन सर्कुलेशन सिस्टम में बाधा आ सकती है, जो वैश्विक जलवायु को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। औसतन समुद्री जल की लवणता लगभग 3.5 प्रतिशत होती है, हालांकि यह विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग पाई जाती है।

उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया के दक्षिण-पश्चिमी तट के पास का दक्षिणी हिंद महासागर अपेक्षाकृत अधिक खारा माना जाता है, जबकि उत्तरी गोलार्ध के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पूर्वी हिंद महासागर से पश्चिमी प्रशांत तक फैला इलाका कम खारापन दर्शाता है। यही अंतर वैश्विक ओशन सर्कुलेशन की विशाल “कन्वेयर बेल्ट” बनाता है, जो पृथ्वी भर में ऊष्मा, नमक और मीठे पानी का वितरण करती है।