इजराइल की वायु सेना का कहना है कि उसने अमेरिका के साथ संयुक्त हमले में पिछले 24 घंटे में ईरान पर 1,200 से ज्यादा बम गिराए हैं। इन हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई है।
उनके ऑफिस कॉम्प्लेक्स पर शनिवार को 30 मिसाइलों से हमला किया गया था। रिपोर्ट के मुताबिक, हमले में उनकी बेटी-दामाद, बहू और पोती समेत कॉम्प्लेक्स में मौजूद 40 कमांडर भी मारे गए। बताया गया कि हमले के समय खामेनेई कमांडरों के साथ बैठक कर रहे थे।
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने शनिवार देर रात खामेनेई के मारे जाने का दावा किया। इसके कुछ देर बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी यही दावा दोहराया। रविवार सुबह ईरान की सरकारी मीडिया एजेंसियों ‘तसनीम’ और ‘फार्स’ ने भी इसकी पुष्टि की।
खामेनेई की मौत के बाद ईरान में 40 दिन का राजकीय शोक और सात दिन की छुट्टी घोषित की गई है। Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) ने बयान जारी कर कहा, “हमने एक महान नेता खो दिया है और पूरा देश शोक मना रहा है।”
इधर ईरानी सेना ने चेतावनी दी है कि वह “सबसे खतरनाक अभियान” शुरू करने जा रही है और अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जाएगा।
हमलों में तेहरान समेत 10 बड़े शहरों को निशाना बनाया गया। अब तक 200 से ज्यादा लोगों की मौत और 740 से अधिक लोगों के घायल होने की खबर है। एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 148 छात्राओं की मौत और 45 के घायल होने की सूचना है। ईरान ने भी जवाबी हमले किए हैं।
अयातुल्ला अली खामेनेई के बारे में
अयातुल्ला अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को मशहद में हुआ था। वे शाह की नीतियों के विरोधी थे और इस्लामी शासन की वकालत करते थे। 1963 में शाह के खिलाफ भाषण देने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया। धीरे-धीरे वे सरकार विरोधी आंदोलन का प्रमुख चेहरा बने और रुहोल्लाह खोमैनी के करीबी सहयोगी माने गए।
1979 की इस्लामी क्रांति के बाद वे क्रांतिकारी परिषद में शामिल हुए और बाद में उप रक्षा मंत्री बने। 1981 में उन पर बम हमला हुआ, जिसमें वे घायल हुए। उसी साल वे भारी बहुमत से ईरान के तीसरे राष्ट्रपति बने। 1989 में खोमैनी के निधन के बाद उन्हें देश का सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया।
ईरान का पलटवार
अमेरिका और इजराइल के हमलों के जवाब में ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इजराइल समेत मिडिल ईस्ट के 9 देशों को निशाना बनाए जाने का दावा किया गया है।
ईरान ने इजराइल पर करीब 400 मिसाइलें दागीं और कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और UAE में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया। UAE के दुबई में पाम होटल एंड रिसोर्ट और बुर्ज खलीफा के पास ड्रोन हमले की भी खबर है।
ईरान-इजराइल विवाद की पृष्ठभूमि
न्यूक्लियर प्रोग्राम: अमेरिका को संदेह है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है। ईरान का कहना है कि उसका कार्यक्रम केवल बिजली और रिसर्च के लिए है।
बैलिस्टिक मिसाइल मुद्दा: ईरान अपनी बैलिस्टिक मिसाइलों को सुरक्षा के लिए जरूरी बताता है और इसे “रेड लाइन” मानता है।
इजराइल को लेकर टकराव: अमेरिका, इजराइल का प्रमुख समर्थक है, जबकि ईरान खुलकर उसका विरोध करता है।
मिडिल ईस्ट में दखल और आर्थिक पाबंदियां: अमेरिका का आरोप है कि ईरान क्षेत्र में अपने समर्थक गुटों को मदद देता है। वहीं अमेरिका ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं, जिनका असर उसकी अर्थव्यवस्था पर पड़ा है।