हमेशा गर्मी शुरू होते ही पानी संकट का खतरा मंडराने लगता है। शहर में बने दाे प्लांटों में केन नदी के पानी को शुद्ध कर मुहल्लों में जलापूर्ति की जाती है। गर्मी पड़ना शुरू हुई नहीं कि प्लांटों में पानी की कमी आड़े आने लगी है। दो एमएलडी (मिलियन लीटर डेली) पानी कम हो गया है। हालांकि जलापूर्ति में इसका अभी कोई खास असर नहीं पड़ रहा है।
अगर नदी का जल स्तर और ज्यादा घटा तो जलापूर्ति की समस्या हो सकती है। हालांकि बीते वर्ष जल संस्थान ने गर्मी में जल संकट से निपटने के लिए केन नदी की जलधारा में स्थाई दीवार बनवाती थी, जिससे पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहे, लेकिन इस समय केन नदी का जल स्तर घटने से बहाव मेें कमी आई है, लिहाजा इंटेकवाल में पानी जाना कम हुआ है। वहीं दूसरी ओर पानी के प्रयोग बढ़ने व जल संस्थान के महज एक बार जलापूर्ति होने से शहर वासियों को समस्या आ रही है। कई मुहल्लों में जलापूर्ति के दौरान फोर्स न होने से घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा है। लिहाजा टुल्लू लगाना पड़ता है। लेकिन इस दौरान अगर बिजली चली गयी ताे वह पानी भी नसीब नहीं हो पा रहा है।
शहर के 31 मुहल्लों के करीब 20 हजार नल कनेक्शन धारकों की जलापूर्ति जल संस्थान करता है। गर्मियों में केन नदी का जल स्तर घटने से हमेशा समस्या आती है। इस बार 10.94 मीटर जल स्तर घट गया है। वर्षा काल में नदी का जल स्तर 104.80 मीटर रहा है, इस समय गर्मी के कारण 93.86 मीटर बचा हुआ है। बहाव कम होने के चलते आवश्यकता से करीब दो एमएलडी पानी जल संस्थान को कम मिल पा रहा है।
शहर की जलापूर्ति भूरागढ़ व बांबेश्वर पहाड़ स्थित प्लांटों सहित सरकारी नलकूपों से होती हैं। दाेनों प्लांटों में केन नदी के पानी को फिल्टर कर उसमें क्लोरिनेशन कर उसे पीने योग्य बना कर सप्लाई किया जाता है। इस समय जलापूर्ति के लिए 26.3 एमएलडी की आवश्यकता है। लेकिन जल स्तर घट जाने से केवल 24.3 एमएलीडी पानी ही मिल पा रहा है। हालांकि जल संस्थान ने बीते वर्ष प्लांट में पानी पहुंचने वाले चैनल इंटेकवाल की सफाई के साथ केन नदी में दीवार खड़ी करवाई थी। जानकारों का कहना है कि मई और जून की तपिश में नदी का जलस्तर और भी घट सकता है। जिससे पानी संकट गहरा सकता है।
एक घंटे की जलापूर्ति अपर्याप्त, कभी-कभी नहीं होती जलापूर्ति
शहर में सुबह छह से सात बजे तक एक घंटे के लिए जलापर्ति जल संस्थान करता है। शहर के ज्यादातर मुहल्लों में पानी का फोर्स (बहाव) कम होने के कारण घरों में नहीं जाता है। ऐसे में टुल्लू लगाकर पानी भरना होता है। लेकिन यदि इस दौरान बिजली आपूर्ति बंद हो गयी तो वह भी पानी नसीब होता। सर्दी के दिनों में तो एक घंटे की आपूर्ति में किसी तरह चल जाता है। लेकिन गर्मी के दिनों में एक घंटे की जलापूर्ति पर्याप्त नहीं है। ऐसे में शहरवासियों ने सुबह व शाम दोनों मीटिंग जलापूर्ति की मांग की है।