सऊदी अरब के लाल सागर तट पर स्थित यानबू बंदरगाह में सऊदी अरामको और एक्सॉनमोबिल की संयुक्त उद्यम 'SAMREF' रिफाइनरी पर गुरुवार को हवाई हमला हुआ। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले का असर कम रहा और इससे रिफाइनरी को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है।
यह हमला ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के कई ऊर्जा ठिकानों को खाली कराने की चेतावनी जारी करने के कुछ ही समय बाद हुआ है। SAMREF भी इनमें शामिल थी। यह हमला अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरानी ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों की जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है।
तेल आपूर्ति की आखिरी आस पर हमला
यानबू बंदरगाह फिलहाल खाड़ी देशों से कच्चे तेल का एकमात्र प्रमुख निर्यात मार्ग है, क्योंकि पिछले महीने युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।
यह संकरा रास्ता दुनियाभर के पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होता है। इससे पहले फुजैराह (यूएई) बंदरगाह भी हमलों के कारण प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।
इराक और ईरान समेत कई खाड़ी देश मिलकर वैश्विक तेल का 31 प्रतिशत और गैस का 8-17 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। कतर के रास लफ्फान एलएनजी संयंत्र पर ईरानी मिसाइल हमले से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।
और बढेगा ऊर्जा संकट
बता दें, SAMREF रिफाइनरी पर हमले से तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ेगी। सऊदी अरब और क्षेत्रीय देश ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन ईरान के जवाबी हमलों से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अगर हमले जारी रहे तो वैश्विक तेल कीमतों में और भी उछाल आ सकता है। वहीं आपोरती बुरी तरह से प्रभावित होगी।