कतर के LNG प्लांट पर हमले से भारत-चीन समेत कई देशों की बढ़ी चिंता, 5 साल तक गैस सप्लाई प्रभावित

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान न सिर्फ इजरायल और अमेरिका पर हमले कर रहा है, बल्कि खाड़ी देशों को भी निशाना बना रहा है। ईरान ने बुधवार रात कतर के तेल और गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

ईरान द्वारा किए गए इस हमले ने कतर की (रास लफान रिफाइनरी) लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता का लगभग 17% हिस्सा ठप कर दिया है। इस हमले से हुए नुकसान से उबरने में और रिपेयर के काम में करीब 5 साल का समय लग सकता है। यह संकट भारत के लिए सबसे गंभीर चुनौती है। भारत अपनी कुल जरूरत की लगभग 47% प्राकृतिक गैस अकेले कतर से आयात करता है।

 कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी ने बताया कि18 मार्च और 19 मार्च, 2026 की सुबह हुए हमलों से प्रमुख उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। इसकी मरम्मत में पांच साल तक का समय लग सकता है, जिसके कारण उसे कुछ LNG अनुबंधों पर दीर्घकालिक 'फोर्स मेज्योर' (अप्रत्याशित घटना के कारण अनुबंध से छूट) घोषित करना पड़ा है।

ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री और कतर एनर्जी के अध्यक्ष और CEO साद शेरिदा अल-काबी ने कहा, "मिसाइल हमलों ने कतर की LNG निर्यात क्षमता को 17 प्रतिशत कम कर दिया है और वार्षिक राजस्व में अनुमानित 20 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया है। हमारी उत्पादन सुविधाओं को हुए भारी नुकसान की मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा और हमें दीर्घकालिक 'फोर्स मेज्योर' घोषित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।"

भारत के लिए चिंता का विषय

इस व्यवधान ने भारत के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर बहुत अधिक निर्भर है। पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के कुल LNG आयात में कतर की हिस्सेदारी लगभग आधी है।

भारत में कब कितनी आपूर्ती हुई?

2024 में, भारत ने लगभग 27.8 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) LNG का आयात किया, जिसमें से कतर ने 11.30 MMT की आपूर्ति की, जिसका मूल्य 6.40 अरब डॉलर था, यह कुल LNG आयात का लगभग 47 प्रतिशत था। पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के 2025-26 के आधिकारिक आंकड़ों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कतर भारत का प्राथमिक गैस आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

घरेलू कीमतों पर दिखेगा असर

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, इस चल रहे व्यवधान से भारत के ऊर्जा आयात के लिए जोखिम बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि उसके सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता से आपूर्ति कम होने से घरेलू बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।

कतर के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन हमलों से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) बनाने वाली दो ट्रेनें - ट्रेन 4 और ट्रेन 6 - क्षतिग्रस्त हो गईं। इन दोनों की कुल उत्पादन क्षमता सालाना 12.8 मिलियन टन (MTPA) है, जो कतर के कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है।

चीन और इटली पर भी पड़ेगा असर

मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने कहा, "LNG सुविधाओं को हुए नुकसान की मरम्मत में तीन से पांच साल का समय लगेगा। इसका असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम पर पड़ेगा। इसका मतलब है कि हमें कुछ दीर्घकालिक LNG अनुबंधों के लिए पांच साल तक 'फोर्स मेज्योर' (अपरिहार्य परिस्थितियों) की घोषणा करने के लिए विवश होना पड़ेगा।"