इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर साफ दिखने लगा है। बढ़ती महंगाई और ईंधन संकट के बीच सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए अगले छह महीने तक मंत्रियों का वेतन रोक दिया है। इससे पहले पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी की गई थी, हालांकि देशभर में विरोध के बाद पेट्रोल की कीमत में आंशिक कटौती कर राहत दी गई।
फिलहाल पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 378 रुपए प्रति लीटर तय की गई है, जबकि डीजल 520.35 रुपए प्रति लीटर पर बना हुआ है। इससे पहले सरकार ने पेट्रोल पर टैक्स बढ़ाकर कीमतें 458 रुपए प्रति लीटर तक पहुंचा दी थीं, जिससे आम जनता पर भारी बोझ पड़ा।
प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने आधी रात को राष्ट्र को संबोधित करते हुए कहा कि महंगाई से राहत देने के लिए पेट्रोल टैक्स में 80 रुपए की कटौती की गई है और नई कीमतें तुरंत लागू कर दी गई हैं। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि कम से कम एक महीने तक कीमतों को स्थिर रखने की कोशिश की जाएगी।
सरकार ने आर्थिक संकट से निपटने के लिए सख्त कदम उठाते हुए पहले मंत्रियों की दो महीने की सैलरी रोकने का निर्णय लिया था, जिसे अब बढ़ाकर छह महीने कर दिया गया है। इसके साथ ही आम लोगों को राहत देने के लिए सरकार ने सब्सिडी और सहायता योजनाओं का भी ऐलान किया है।
मोटरसाइकिल चालकों को पेट्रोल पर अतिरिक्त सब्सिडी, छोटे किसानों को प्रति एकड़ आर्थिक मदद और रेलवे के इकोनॉमी क्लास किराए में बढ़ोतरी न करने जैसे फैसले लिए गए हैं। सरकार का कहना है कि इन कदमों से आम जनता पर बढ़ते खर्च का असर कुछ हद तक कम किया जा सकेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में पश्चिम एशिया के हालात को महंगाई की बड़ी वजह बताया। उनका कहना है कि ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में तनाव और तेल आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। पिछले कुछ हफ्तों में कीमतों में लगातार उछाल देखने को मिला है, जिससे पाकिस्तान जैसे आयात पर निर्भर देशों पर ज्यादा असर पड़ा है।
इस बीच, वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमत भी बढ़कर करीब 110 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गई है। भारत में भी पहले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर कीमतों को नियंत्रित करने की कोशिश की गई थी, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।