ईरान के साथ जारी संघर्ष के एक महीने बाद Donald Trump ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित करते हुए दावा किया था कि अमेरिका ने ईरान की हवाई ताकत को लगभग खत्म कर दिया है और अब उसके पास जवाब देने की क्षमता नहीं बची। उन्होंने यहां तक कहा कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा नियंत्रण है और उसके लड़ाकू विमान तेहरान के ऊपर बिना रोक-टोक उड़ान भर रहे हैं। इसी तरह के बयान विदेश मंत्री Marco Rubio की ओर से भी दिए गए थे, लेकिन जमीनी हालात अब इन दावों से अलग तस्वीर दिखा रहे हैं।
पिछले 24 घंटों में ही अमेरिकी सेना को बड़ा झटका लगा है। F-15E Strike Eagle जैसे उन्नत फाइटर जेट को मार गिराया गया, जबकि रेस्क्यू मिशन पर पहुंचे A-10 Thunderbolt II पर भी हमला हुआ। इसके अलावा सर्च ऑपरेशन में लगे UH-60 Black Hawk हेलीकॉप्टरों को भी निशाना बनाया गया। हालांकि इनमें सवार अमेरिकी सैनिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 23 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब दुश्मन की गोलीबारी में अमेरिकी फाइटर जेट गिराए गए हैं। इससे पहले Iraq War 2003 के दौरान ऐसी घटना सामने आई थी। 28 फरवरी से शुरू हुए इस संघर्ष में अब तक 7 अमेरिकी विमान तबाह होने की बात कही जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अमेरिका को ईरान के हवाई क्षेत्र में बढ़त हासिल हो, लेकिन वह पूरी तरह नियंत्रण स्थापित नहीं कर पाया है। ईरान का एयर डिफेंस सिस्टम कमजोर जरूर हुआ है, मगर अब भी सक्रिय है और मौके देखकर हमला करने में सक्षम है।
इस स्थिति के पीछे ईरान की ‘असिमेट्रिक वॉरफेयर’ रणनीति को अहम माना जा रहा है। यानी सीधे टकराव के बजाय कम संसाधनों में अधिक नुकसान पहुंचाने की नीति। इसी रणनीति के तहत ईरान अचानक और अप्रत्याशित हमले कर रहा है, जिससे अमेरिका के लिए उसकी चाल समझना मुश्किल हो रहा है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार इन हमलों में Majid Air Defense System या कंधे से दागी जाने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल हो सकता है। यह सिस्टम खासतौर पर कम ऊंचाई पर उड़ने वाले टारगेट को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है और इसमें इंफ्रारेड तकनीक का उपयोग होता है, जिससे यह रडार से बच निकलता है। इसकी मारक क्षमता लगभग 8 किलोमीटर दूरी और 6 किलोमीटर ऊंचाई तक मानी जाती है।
इसके अलावा, ईरान अब मोबाइल एयर डिफेंस सिस्टम का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। ये सिस्टम तेजी से अपनी लोकेशन बदल सकते हैं और अक्सर भूमिगत ठिकानों या कठिन इलाकों में छिपे रहते हैं। ‘फायर करो और तुरंत हट जाओ’ की रणनीति के कारण इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
कुछ रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि ईरान उन्नत मिसाइल सिस्टम जैसे HQ-9B का इस्तेमाल कर सकता है, जिसमें रडार और इंफ्रारेड दोनों तकनीकों का संयोजन होता है। इससे उसकी रक्षा क्षमता और अधिक मजबूत हो जाती है।