प्रवासी मजदूरों को बड़ी राहत: 5 किलो वाले सिलिंडर की नहीं होगी कोई कमी, सरकार ने दोगुना कर दिया कोटा

मिडिल ईस्ट में जार युद्ध के कारण भारत में एलपीजी सिलिंडर में आई बाधाओं के बीच केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। क्रेंद्र रकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आवंटित होने वाले 5 किलोग्राम के एलपीजी सिलिंडरों की मात्रा दोगुनी करने का निर्णय लिया है।

दरअसल, केंद्र सरकार की ओर से यह कदम प्रवासी मजदूरों और समाज के कमजोर वर्गों को ईंधन की कमी से बचाने और उन्हें कालाबाजारी से रोकने के लिए उठाया गया है। सबसे खास बात यह है कि इस पांच किलो के सिलिंडर को सिर्फ पहचान पत्र दिखाकर आसानी से खरीदा जा सकता है।

कालाबाजारी से बचने के लिए सरकार का बड़ा कदम

यह सिलिंडर विशेषकर उन श्रमिकों के लिए रिजर्व रखा जाएगा जिनके पास स्थायी पते का प्रमाण नहीं है। क्योंकि, नियमित घरेलू गैस कनेक्शन के लिए उपभोक्ताओं को पते का प्रमाण देना पड़ता है। जो प्रवासियों के लिए मुश्किल हो जाता है और वे मजबूरन कालाबाजारियों से खाना पकाने की गैस ऊंची कीमतों पर खरीदते हैं।

राज्यों को आवंटित यह अतिरिक्त सिलिंडर इस वर्ष 2-3 मार्च के दौरान प्रवासी श्रमिकों को उपलब्ध कराए गए सिलिंडरों की औसत दैनिक आपूर्ति के आधार पर निर्धारित की जाएगी। यह अतिरिक्त आवंटन 21 मार्च को निर्धारित की गई 20 प्रतिशत की मौजूदा सीमा से भी ऊपर होगा।

5 किलो वाला सिलिंडर लेने के लिए क्या करना होगा?

केंद्र सरकार ने 5-किलो वाले 'फ्री ट्रेड एलपीजी' सिलिंडर को अब बिना एड्रेस प्रूफ देने की अनुमति दे दी है। इसे लेने के लिए अपने पास के एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर के पास जाना होगा। जहां आप सिर्फ अपनी एक वैध आईडी कार्ड दिखाकर इसे खरीद सकते हैं। इस बात का ध्यान रखें कि पांच किलो वाला छोटू सिलिंडर सिर्फ घरेलू यूज के लिए है। इनका कामर्शियल उपयोग पूरी तरह वर्जित है।

कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई तेज, अब तक 50000 सिलिंडर जब्त

पीटीआई के अनुसार, अधिकारियों ने बताया कि एलपीजी सिलिंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी गई है। अब तक 50,000 से ज्यादा सिलिंडर जब्त किए गए हैं।

एलपीजी वितरकों को 1,400 से ज्यादा कारण बताओ नोटिस थमाए गए हैं और इनमें से 36 की डीलरशिप निलंबित की जा चुकी हैं। साथ ही उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे ऊर्जा की बचत करें और अफवाहों से सावधान रहें। ईंधन का पर्याप्त स्टाक उपलब्ध है। रिफाइनरियां पूरी क्षमता से उत्पादन कर रही हैं।