पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति की तस्वीर बदल दी है। चुनाव के बाद सबसे ज्यादा चर्चा वोट शेयर और वोटों के अंतर को लेकर हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक, 2024 के लोकसभा चुनाव की तुलना में भाजपा को करीब 56 लाख ज्यादा वोट मिले हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस के लगभग 17 लाख वोट घट गए हैं।
वोट शेयर के आंकड़े भी बड़ा बदलाव दिखा रहे हैं। 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट शेयर 38.7 प्रतिशत था, जो विधानसभा चुनाव में बढ़कर 45.8 प्रतिशत तक पहुंच गया। वहीं तृणमूल कांग्रेस का वोट शेयर 40.8 प्रतिशत से घटकर 36.1 प्रतिशत रह गया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जमीन पर सत्ता विरोधी माहौल, ध्रुवीकरण और बूथ स्तर पर भाजपा की मजबूत रणनीति ने पार्टी को बड़ा फायदा पहुंचाया।
TMC के कई मजबूत गढ़ टूटे
आंकड़ों के अनुसार, तृणमूल कांग्रेस ने इस बार अपने कई मजबूत गढ़ खो दिए। 2019, 2021 और 2024 के चुनावों में जिन 124 सीटों पर टीएमसी लगातार मजबूत स्थिति में थी, उनमें से 78 सीटें इस बार उसके हाथ से निकल गईं।
वहीं भाजपा ने कई नई सीटों पर जीत दर्ज की। पिछले चुनावों में जिन इलाकों में भाजपा कभी मजबूत नहीं मानी जाती थी, वहां भी पार्टी ने बढ़त हासिल की। रिपोर्ट के मुताबिक भाजपा ने 65 ऐसी सीटें जीतीं, जहां पहले उसकी पकड़ कमजोर थी। राज्य में कुल 294 सीटों में से भाजपा ने 207 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि 15 साल से सत्ता में रही तृणमूल कांग्रेस 80 सीटों पर सिमट गई।
मुस्लिम वोट और सीटों पर भी चर्चा
चुनाव के बाद मुस्लिम वोटों के असर को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन सीटों पर पहले मुस्लिम विधायक जीतते रहे थे, वहां इस बार भी बड़ी संख्या में मुस्लिम उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की।
बताया गया कि 39 ऐसी सीटें थीं, जहां 2011, 2016 और 2021 में मुस्लिम विधायक चुने गए थे। इस बार भी इनमें से 34 सीटों पर मुस्लिम उम्मीदवार ही जीते। कुल मिलाकर 40 मुस्लिम विधायक चुने गए, जो 2021 के आसपास के आंकड़ों के बराबर है। टीएमसी के विधायक दल में मुस्लिम विधायकों की हिस्सेदारी करीब 42.5 प्रतिशत बताई जा रही है।
क्या रहा भाजपा की जीत का सबसे बड़ा कारण?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि भाजपा ने बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत किया और ग्रामीण इलाकों में लगातार काम किया। पार्टी को लोकसभा चुनाव के मुकाबले इस बार काफी ज्यादा वोट मिले।
दूसरी ओर, टीएमसी को कई सीटों पर वोट शेयर में गिरावट का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, जिन 293 सीटों पर मतदान हुआ, उनमें से 268 सीटों पर टीएमसी का वोट शेयर घटा है।
भाजपा ने 270 सीटों पर अपने वोट शेयर में बढ़ोतरी दर्ज की और 95 सीटों पर पार्टी का वोट शेयर 10 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ा। यही वजह रही कि बंगाल की राजनीति में पहली बार भाजपा इतनी बड़ी ताकत बनकर उभरी है।