Bharat Education Conclave 2026 में केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने NEET-UG परीक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य 21 जून को होने वाली परीक्षा को “100 फीसदी एरर फ्री” बनाना है। उन्होंने कहा कि सरकार नहीं चाहती थी कि देश के छात्र शिक्षा माफिया के चंगुल में फंसें, इसलिए NEET परीक्षा को रद्द करने का फैसला लिया गया।
कार्यक्रम के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा, नई शिक्षा नीति और भारतीय भाषाओं की भूमिका पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कश्मीर की सरस्वती ज्ञान परंपरा, पुरी के जगन्नाथ धाम और कोणार्क सूर्य मंदिर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत की शिक्षा व्यवस्था की जड़ें बेहद समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई हैं।
उन्होंने कहा कि Sarvepalli Radhakrishnan, Swami Vivekananda और Mahatma Gandhi जैसे महान व्यक्तित्वों ने भारतीय शिक्षा प्रणाली की मजबूत नींव रखी थी। वहीं 70 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री Indira Gandhi के समय शिक्षा व्यवस्था को मैकाले पद्धति की ओर मोड़ दिया गया।
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि Narendra Modi सरकार ने नई शिक्षा नीति के जरिए भारतीय शिक्षा को फिर से भारतीय ज्ञान परंपरा से जोड़ने की कोशिश की है। इसके तहत कक्षा 5 तक मातृभाषा में पढ़ाई पर जोर दिया गया है, जबकि कक्षा 10 तक तीन भाषाएं पढ़ाने की योजना बनाई गई है।
उन्होंने यह भी कहा कि वे बच्चों को विदेशी भाषाएं सीखने के पक्ष में हैं, खासकर उन छात्रों के लिए जो अंतरराष्ट्रीय व्यापार या वैश्विक स्तर पर काम करना चाहते हैं। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी भाषा को छात्रों पर थोपा नहीं जाना चाहिए।
केंद्रीय मंत्री ने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि आज ग्लोबल साउथ की उम्मीदें भारत से जुड़ी हुई हैं। दुनिया की बड़ी युवा आबादी भारत में है और देश इनोवेशन, रिसर्च और कम लागत वाले प्रोडक्शन मॉडल के जरिए वैश्विक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि भारत को अब “इंटरप्रेटर” नहीं बल्कि “इनोवेटर” बनने की जरूरत है, ताकि देश वैश्विक स्तर पर नई तकनीक और रिसर्च में अग्रणी भूमिका निभा सके।