अमेरिका ने ईरान के तेल की खरीद पर 30 दिन की छूट दी

ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी है। ये छूट केवल समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकरों की खरीद के लिए है। अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा की। ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल के लिए है।

ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए ऐसा किया गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से क्रूड की कीमतें 110 डॉलर के पार निकल गई है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले ये 70 डॉलर के करीब थी।

स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दुनिया के लिए इस मौजूदा सप्लाई को अस्थायी रूप से खोलकर ग्लोबल मार्केट में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल तेजी से आएगा। इससे दुनियाभर में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और सप्लाई पर जो अस्थायी दबाव बना है, उसे कम करने में मदद मिलेगी।

रूसी तेल की खरीद पर दूसरी बार प्रतिबंध हटाया

ट्रम्प प्रशासन ने गुरुवार को एक नया 'जनरल लाइसेंस' जारी किया, जिसके तहत उन रूसी टैंकरों से तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी।

नया लाइसेंस 12 मार्च को जारी किए गए पिछले 30 दिनों के 'सेंक्शंस वेवर' की जगह लेगा। पुराने लाइसेंस में कुछ तकनीकी स्पष्टता की कमी थी। नए लाइसेंस के जरिए उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया को इस छूट से बाहर कर दिया है।

युद्ध के कारण 120 डॉलर तक पहुंच गई थी तेल की कीमतें

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड आज 112 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। बीते दिनों ये 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।

तेल की कीमतों के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

ईरान पर प्रतिबंधों की शुरुआत 1979 में हुई थी

ईरान पर तेल प्रतिबंध मुख्य रूप से उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से लगाए गए थे। ईरान पर प्रतिबंधों की शुरुआत 1979 में हुई थी, जब तेहरान में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया था।

2015: ओबामा प्रशासन के दौरान ईरान के साथ परमाणु समझौता (JCPOA) हुआ था। इसके बदले में ईरान पर से तेल निर्यात करने के कलिए कई पाबंदियां हटा ली गई थीं।

2018: तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने परमाणु समझौते से बाहर निकलते हुए कड़े प्रतिबंध लगा दिए। ईरान की तेल की कमाई को 'जीरो' करने के लिए ऐसा किया गया।

अब नीचे सवाल-जवाब में इस फैसले की वजह और असर…

सवाल 1: अमेरिका ने अचानक ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील क्यों दी?

जवाब: ईरान के साथ युद्ध शुरू हुए तीन हफ्ते हो चुके हैं। इस दौरान मिडिल-ईस्ट में तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप हो गई है।

कच्चे तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस 'एनर्जी क्राइसिस' से निपटने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

सवाल 2: क्या यह अमेरिका का ईरान के प्रति नरम रुख है?

जवाब: बिल्कुल नहीं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने X पर लिखा, "हम तेहरान के खिलाफ ही ईरानी बैरल का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि कीमतें कम रखी जा सकें।" अमेरिका का तर्क है कि यह तेल वैसे भी चोरी-छिपे चीन को बेचा जाता, इससे बेहतर है कि इसे वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगी देश खरीद लें।

सवाल 3: इस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई का ईरान क्या करेगा?

जवाब: अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान के लिए इस कमाई को हासिल करना बहुत मुश्किल होगा। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा ताकि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल न कर सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतें 33% तक बढ़ चुकी हैं, ऐसे में ईरान को कुछ न कुछ आर्थिक फायदा तो जरूर होगा।

सवाल 4: क्या 14 करोड़ बैरल तेल दुनिया की जरूरत के लिए काफी है?

जवाब: यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की सिर्फ डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यूरेशिया ग्रुप के एनालिस्ट ग्रेगरी ब्रू का कहना है कि यह स्टॉक बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। इसके बाद अमेरिका के पास या तो ईरान पर से पूरी तरह बैन हटाने का विकल्प बचेगा या फिर कोई और कड़ा रास्ता चुनना होगा।

सवाल 5: 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' क्या है और इसमें तेल का क्या रोल है?

जवाब: यह ट्रम्प प्रशासन का ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक अभियान है। एक तरफ अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह नहीं चाहता कि इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा जाए। तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अहम हिस्सा है ताकि अमेरिकी वोटर्स और सहयोगी देशों पर महंगाई का बोझ न पड़े।

सवाल 6: स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप का क्या स्टैंड है?

जवाब: दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसे ईरान ने लगभग बंद कर रखा है। ट्रम्प ने इसे लेकर कहा कि एक समय के बाद यह अपने आप खुल जाएगा। वह फिलहाल सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और तेल की कमी को अस्थायी दर्द मान रहे हैं।

सवाल 7: आगे क्या होगा? एक्सपर्ट्स की क्या राय है?

जवाब: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं। पूर्व अधिकारी लैंडन डेरेंट्ज़ के मुताबिक, स्थिति बहुत गंभीर है। अब या तो अमेरिका को किसी भी तरह स्ट्रैट ऑफ होर्मुज खुलवाना होगा या फिर और भी गंभीर आर्थिक परिणामों के लिए तैयार रहना होगा।

नॉलेज बॉक्स: 'सेंक्शंस वेवर' क्या होता है?

जब एक देश दूसरे पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाता है, तो कुछ खास स्थितियों में व्यापार जारी रखने के लिए जो कानूनी छूट दी जाती है, उसे 'वेवर' कहते हैं। अमेरिका अक्सर अपनी जरूरत और ग्लोबल मार्केट के संतुलन के लिए ऐसे अस्थायी वेवर जारी करता रहता है।

भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। अगर ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल एक्स्ट्रा तेल आता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं।


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कतर के LNG प्लांट पर हमले से भारत-चीन समेत कई देशों की बढ़ी चिंता, 5 साल तक गैस सप्लाई प्रभावित

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान न सिर्फ इजरायल और अमेरिका पर हमले कर रहा है, बल्कि खाड़ी देशों को भी निशाना बना रहा है। ईरान ने बुधवार रात कतर के तेल और गैस प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया।

ईरान द्वारा किए गए इस हमले ने कतर की (रास लफान रिफाइनरी) लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) निर्यात क्षमता का लगभग 17% हिस्सा ठप कर दिया है। इस हमले से हुए नुकसान से उबरने में और रिपेयर के काम में करीब 5 साल का समय लग सकता है। यह संकट भारत के लिए सबसे गंभीर चुनौती है। भारत अपनी कुल जरूरत की लगभग 47% प्राकृतिक गैस अकेले कतर से आयात करता है।

 कतर एनर्जी के सीईओ साद अल-काबी ने बताया कि18 मार्च और 19 मार्च, 2026 की सुबह हुए हमलों से प्रमुख उत्पादन सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है। इसकी मरम्मत में पांच साल तक का समय लग सकता है, जिसके कारण उसे कुछ LNG अनुबंधों पर दीर्घकालिक 'फोर्स मेज्योर' (अप्रत्याशित घटना के कारण अनुबंध से छूट) घोषित करना पड़ा है।

ऊर्जा मामलों के राज्य मंत्री और कतर एनर्जी के अध्यक्ष और CEO साद शेरिदा अल-काबी ने कहा, "मिसाइल हमलों ने कतर की LNG निर्यात क्षमता को 17 प्रतिशत कम कर दिया है और वार्षिक राजस्व में अनुमानित 20 अरब डॉलर का नुकसान पहुंचाया है। हमारी उत्पादन सुविधाओं को हुए भारी नुकसान की मरम्मत में पांच साल तक का समय लगेगा और हमें दीर्घकालिक 'फोर्स मेज्योर' घोषित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।"

भारत के लिए चिंता का विषय

इस व्यवधान ने भारत के लिए चिंताएं बढ़ा दी हैं, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए कतर पर बहुत अधिक निर्भर है। पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के आधिकारिक आंकड़े दिखाते हैं कि भारत के कुल LNG आयात में कतर की हिस्सेदारी लगभग आधी है।

भारत में कब कितनी आपूर्ती हुई?

2024 में, भारत ने लगभग 27.8 मिलियन मीट्रिक टन (MMT) LNG का आयात किया, जिसमें से कतर ने 11.30 MMT की आपूर्ति की, जिसका मूल्य 6.40 अरब डॉलर था, यह कुल LNG आयात का लगभग 47 प्रतिशत था। पेट्रोलियम योजना और विश्लेषण प्रकोष्ठ (PPAC) और वाणिज्य मंत्रालय के 2025-26 के आधिकारिक आंकड़ों ने भी इस बात की पुष्टि की है कि कतर भारत का प्राथमिक गैस आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

घरेलू कीमतों पर दिखेगा असर

बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच, इस चल रहे व्यवधान से भारत के ऊर्जा आयात के लिए जोखिम बढ़ने की उम्मीद है, क्योंकि उसके सबसे बड़े आपूर्तिकर्ता से आपूर्ति कम होने से घरेलू बाजार में उपलब्धता और कीमतों पर असर पड़ सकता है।

कतर के आधिकारिक बयान के अनुसार, इन हमलों से लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) बनाने वाली दो ट्रेनें - ट्रेन 4 और ट्रेन 6 - क्षतिग्रस्त हो गईं। इन दोनों की कुल उत्पादन क्षमता सालाना 12.8 मिलियन टन (MTPA) है, जो कतर के कुल निर्यात का लगभग 17 प्रतिशत है।

चीन और इटली पर भी पड़ेगा असर

मंत्री साद शेरिदा अल-काबी ने कहा, "LNG सुविधाओं को हुए नुकसान की मरम्मत में तीन से पांच साल का समय लगेगा। इसका असर चीन, दक्षिण कोरिया, इटली और बेल्जियम पर पड़ेगा। इसका मतलब है कि हमें कुछ दीर्घकालिक LNG अनुबंधों के लिए पांच साल तक 'फोर्स मेज्योर' (अपरिहार्य परिस्थितियों) की घोषणा करने के लिए विवश होना पड़ेगा।"


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तेल आपूर्ति की 'आखिरी आस' पर महासंकट! होर्मुज के बाद यानबू को निशाना बना रहा ईरान

सऊदी अरब के लाल सागर तट पर स्थित यानबू बंदरगाह में सऊदी अरामको और एक्सॉनमोबिल की संयुक्त उद्यम 'SAMREF' रिफाइनरी पर गुरुवार को हवाई हमला हुआ। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हमले का असर कम रहा और इससे रिफाइनरी को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुंचा है।

यह हमला ईरान के इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) द्वारा सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कतर के कई ऊर्जा ठिकानों को खाली कराने की चेतावनी जारी करने के कुछ ही समय बाद हुआ है। SAMREF भी इनमें शामिल थी। यह हमला अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरानी ऊर्जा सुविधाओं पर हमलों की जवाबी कार्रवाई मानी जा रही है।

तेल आपूर्ति की आखिरी आस पर हमला 

यानबू बंदरगाह फिलहाल खाड़ी देशों से कच्चे तेल का एकमात्र प्रमुख निर्यात मार्ग है, क्योंकि पिछले महीने युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है।

यह संकरा रास्ता दुनियाभर के पांचवें हिस्से की तेल आपूर्ति के लिए इस्तेमाल होता है। इससे पहले फुजैराह (यूएई) बंदरगाह भी हमलों के कारण प्रभावित है, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट गहरा गया है।

इराक और ईरान समेत कई खाड़ी देश मिलकर वैश्विक तेल का 31 प्रतिशत और गैस का 8-17 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। कतर के रास लफ्फान एलएनजी संयंत्र पर ईरानी मिसाइल हमले से बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ।

और बढेगा ऊर्जा संकट

बता दें, SAMREF रिफाइनरी पर हमले से तेल बाजार में अस्थिरता और बढ़ेगी। सऊदी अरब और क्षेत्रीय देश ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहे हैं, लेकिन ईरान के जवाबी हमलों से स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अगर हमले जारी रहे तो वैश्विक तेल कीमतों में और भी उछाल आ सकता है। वहीं आपोरती बुरी तरह से प्रभावित होगी।


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पश्चिम एशिया में तनाव के बीच मुंद्रा पोर्ट पहुंचा भारतीय झंडे वाला ‘जग लाडकी’ जहाज, UAE से आया कच्चा तेल

पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच भारतीय झंडे वाला तेल टैंकर जग लाडकी गुजरात के अडानी पोर्ट्स मुंद्रा पर पहुंच गया है। यह देश के ऊर्जा आयात में बेहद अहम वृद्धि है।

जहाज लगभग 80,886 मीट्रिक टन कच्चे तेल के साथ बंदरगाह पर पहुंचा। यह कार्गो यूएई से मंगाया गया था और इसे फुजैराह बंदरगाह पर लादा गया था। कुल 274.19 मीटर लंबाई और 50.04 मीटर चौड़ाई वाले इस टैंकर का डेडवेट टन भार लगभग 164,716 टन और सकल टन भार लगभग 84,735 टन है।

मुंद्रा पोर्ट पर भारी मात्रा में आता है तेल

मुंद्रा में इस टैंकर का आना इस बात को दिखाता है कि भारी मात्रा में कच्चे तेल के आयात को संभालने में अडानी पोर्ट्स की सुविधा कितनी अहम भूमिका निभाती है। इस तरह की खेप प्रमुख रिफाइनरियों के लिए बेहद जरूरी हैं, जो अपने कामकाज को सुचारू रूप से चलाने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इन्हीं खेपों पर निर्भर रहती हैं।

ये समुद्री घटनाक्रम पश्चिम एशिया में बढ़ते क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि में सामने आए हैं। इससे पहले भारत का झंडा लगे दो एलपीजी कैरियर 16 और 17 मार्च को भारत पहुंचे। इससे पहले इन जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित रूप से पार कर लिया था। एमटी शिवालिक और नंदा देवी में लगभग 92,712 मीट्रिक टन एलपीजी लदी थी।

भारत का ऑपरेशन संकल्प

अपने व्यापारिक हितों की रक्षा करते हुए भारत ऑपरेशन संकल्प के तहत इन जलक्षेत्रों में अपनी नौसैनिक उपस्थिति लगातार बनाए हुए है। यह पहल महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करने और जग लाडकी जैसे जहाजों की सुरक्षित डॉकिंग सुनिश्चित करने के लिए समर्पित है।

इसके साथ ही शिपिंग महानिदेशालय (DG Shipping) जहाज मालिकों, भर्ती और प्लेसमेंट सेवा लाइसेंस (RPSL) एजेंसियों और इस क्षेत्र में मौजूद भारतीय राजनयिक मिशनों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए स्थिति पर बारीकी से नजर रख रहा है।


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United States में शराब की खपत घटी, कंपनियों की कमाई पर बड़ा झटका

अमेरिका में शराब की खपत घट रही है। इसका सबसे बड़ा असर रेस्तरां बिजनेस पर पड़ रहा है। 2025 के गैलप पोल के मुताबिक अमेरिका में शराब पीने वालों की हिस्सेदारी निचले स्तर पर है। सिर्फ 54% लोगों ने कहा कि वे शराब पीते हैं। जो पीते हैं, वे भी पहले से कम पी रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण सेहत पर असर और शराब की कीमतों में बढ़ोतरी माना जा रहा है।

2025 में 31% अमेरिकी ऑपरेटर्स ने शराब बिक्री में गंभीर गिरावट की बात कही। न्यू जर्सी के मोंटक्लेयर में रेस्टोरेंट चलाने वाले डेमन वाइज ने बताया कि पहले उनकी कमाई का फॉर्मूला 40% खाना और 60% शराब था। पहले 50-50 हुआ। फिर 70% कमाई खाने से और सिर्फ 30% शराब से आने लगी।

मिलेनियल्स ने कम की शराब, जेन-जी ने फेरा मुंह

टेक्नोमिक की 2026 रिपोर्ट के अनुसार, शराब के सबसे बड़े शौकीन रहे मिलेनियल्स (31-45 वर्ष) अब इससे दूरी बना रहे हैं। वहीं जेन-जी युवा उस खालीपन को नहीं भर पा रहे हैं। वे रेस्टोरेंट में अक्सर सिर्फ एक ड्रिंक और फोटो तक सीमित हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक महंगाई या कैनाबिस जैसे विकल्पों के कारण नई पीढ़ी शराब पर पैसा खर्च नहीं करना चाहती।

सेहत, आदतें और जीएलपी-1 दवाएं भी एक बड़ी वजह

जनवरी 2025 में यूएस सर्जन जनरल विवेक मूर्ति की रिपोर्ट में हल्की या मध्यम शराब खपत को भी कैंसर रिस्क से जोड़ा गया। इसके अलावा सेहत को लेकर बढ़ती जागरूकता, पीढ़ियों की बदलती आदतें और करीब 6% अमेरिकियों का जीएलपी-1 दवाओं का इस्तेमाल भी वजह मानी जा रही है। इन दवाओं से शराब की इच्छा कम होने के संकेत मिले हैं।

महंगी शराब और बेरोजगारी ने तोड़ी युवाओं की कमर

लॉस एंजिल्स के व्यवसायी डस्टिन लैंकेस्टर के अनुसार बढ़ती लागत युवाओं को शराब से दूर कर रही है। पहले व्हिस्की और बीयर 8 डॉलर यानी करीब 730 रुपए में मिल जाती थी, जिसकी कीमत अब 20 डॉलर यानी 1,800 रुपए तक पहुंच गई है। टेक्नोमिक रिपोर्ट के मुताबिक 9.2% बेरोजगारी दर के कारण जेन-जी की जेब पर भी दबाव बढ़ा है।


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मिसाइल अलर्ट से मचा हड़कंप, दुबई-दोहा में धमाके; ओमान के पास टैंकर हादसा

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच का संघर्ष हाल के वर्षों में मिडिल ईस्ट के सबसे ज्यादा संकटों में से एक बन गया है, जिसमें इस क्षेत्र के कई देशों में मिसाइल हमले, ड्रोन हमले और हवाई हमलों की खबरें सामने आई हैं।

इस बीच दुबई और दोहा में मिसाइल अलर्ट के बाद धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि देश के पूर्वी हिस्से में ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया गया। इससे पहले मंत्रालय ने बताया था कि देश के उसी क्षेत्र में सऊदी सेनाओं द्वारा छह ड्रोन भी इस्तेमाल किए गए थे, जिन्हें सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया।

बगदाद एयरपोर्ट के पास अमेरिकी राजनयिक केंद्र पर रॉकेटों से फिर हमला

बगदाद एयरपोर्ट के पास एक अमेरिकी राजनयिक केंद्र को निशाना बनाकर रॉकेट हमलों की एक और लहर की खबर मिली है। सुरक्षा सूत्रों ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि इस ताजा हमले के बाद इलाके में सायरन बजने की आवाजें सुनी गईं। इससे पहले, बगदाद में अमेरिकी दूतावास को भी रॉकेटों और कई ड्रोन से निशाना बनाए जाने की खबर थी।

UAE के तट के पास टैंकर से टक्कर

मंगलवार तड़के यूएई के पूर्वी तट पर लंगर डाले एक टैंकर पर एक मिसाइल से हमला हुआ। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस ने इस घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह जहाज फुजैरा के पास ओमान की खाड़ी में मौजूद था। टैंकर को मामूली नुकसान पहुंचा, लेकिन किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।

ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद से इस क्षेत्र में लगभग 20 जहाजों पर हमले होने की खबर है। ईरान के हमलों ने होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले यातायात को काफी हद तक बाधित कर दिया है।


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जापान-ऑस्ट्रेलिया ने होर्मुज में वॉरशिप भेजने से इनकार किया

अमेरिका-इजराइल और ईरान जंग का आज 17वां दिन है। इस बीच जापान और आस्ट्रेलिया ने होर्मुज स्ट्रेट में वॉरशिप भेजने से इनकार कर दिया है।

जापान की प्रधानमंत्री सना ताकाइची ने संसद में कहा है कि टोक्यो का होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले तेल टैंकरों की सुरक्षा के लिए नौसेना भेजने का फिलहाल कोई इरादा नहीं है। जापान अपनी क्रूड ऑयल का लगभग 90% और LNG का 11% इस रूट से ले जाता है।

ऑस्ट्रेलिया ने भी साफ कर दिया है कि वह होर्मुज में अपने युद्धपोत नहीं भेजेगा। ऑस्ट्रेलिया खुद LNG एक्सपोर्ट करता है, लेकिन रिफाइंड फ्यूल (पेट्रोल, डीजल, जेट फ्यूल) के लिए आयात पर निर्भर है। ऑस्ट्रेलिया के क्रूड ऑयल का 40-60% इस रूट से गुजरता है।

दरअसल, ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट का इस्तेमाल करने वाले देशों से इस रास्ते का रक्षा करने के लिए वॉरशिप और जरूरी मदद भेजने की मांग की थी। दुनियाभर का 20% तेल इसी रूट से गुजरता है।

इसे लेकर ट्रम्प ने रविवार को NATO देशों को भी धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर सहयोगी देश होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखने में मदद नहीं करते हैं तो NATO का भविष्य बहुत खराब हो सकता है।

ईरान ने इजराइल पर ‘सेजिल बैलिस्टिक मिसाइल’ दागी

ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि इजराइल के सैन्य और डिफेंस फैसिलिटी को निशाना बनाया गया है। यह सॉलिड फ्यूल वाली स्ट्रैटेजिक मिसाइल है, जो 2000-2500 किलोमीटर तक हमला कर सकती है।

द नेशनल इंटरेस्ट पत्रिका के अनुसार, इस मिसाइल की पहुंच मिस्र, सूडान के कुछ हिस्सों, यूक्रेन के बड़े हिस्से, दक्षिणी रूस, पश्चिमी चीन, भारत और हिंद महासागर और भूमध्य सागर के बड़े क्षेत्रों तक हो सकती है।

जंग के बीच UAE में 19 भारतीय गिरफ्तार, फेक न्यूज फैलाने का आरोप

जंग के बीच UAE ने 35 लोगों को गिरफ्तार करने का आदेश दिया, जिनमें 19 भारतीय हैं। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक इन पर सोशल मीडिया पर फेक वीडियो और जानकारी फैलाने का आरोप है।

UAE के अटॉर्नी जनरल डॉ. हमद सैफ अल शम्स ने बताया कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म की निगरानी के बाद उठाया गया है, ताकि झूठी जानकारी फैलाकर अशांति या डर फैलाने से रोका जा सके।



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अमेरिका ने H-1B वीजा देने की प्रक्रिया में किया बदलाव

अमेरिका ने एच-1बी वीजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों का चयन रैंडम लॉटरी के बजाय वेतन के आधार पर होगा। इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने फॉर्म I-129 का नया सिस्टम बनाया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य कर दिया जाएगा।

कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए दाखिल याचिका में नौकरी से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे पहले की तुलना में ज्यादा अनुभवी और हाई सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।

नए सिस्टम में आवेदकों को चार वेतन स्तरों में बांटा जाएगा। जिस पद का वेतन स्तर जितना ऊंचा होगा, चयन प्रक्रिया में उसे उतने अधिक मौके मिलेंगे। मसलन, लेवल-4 के उम्मीदवार को चार मौके मिलेंगे, जबकि लेवल-1 को सिर्फ एक मौका मिलेगा।

फॉर्म I-129 का उपयोग अस्थायी कामगारों को अमेरिका बुलाने के लिए किया जाता है। अमेरिका का श्रम विभाग हर पेशे और शहर के लिए एक मानक वेतन तय करता है। उसी के आधार पर नौकरी को लेवल-1 से लेवल-4 में रखा जाता है।

70% एच-1 बी वीजा भारतीयों को मिलता है

ट्रम्प के आदेश का क्या असर- भारतीयों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा, क्योंकि हर साल कुल जारी किए जाने वाले एच-1बी वीजा में से 70% भारतीय प्रोफेशनल्स को जारी किए जाते हैं।

एच-1 बी वीजा की फीस कितनी- पहले फीस लगभग 9 हजार डॉलर यानी करीब 8 लाख 30 हजार रुपए थी, लेकिन सितंबर 2025 में ट्रम्प ने इसे बढ़ाकर 1 लाथ डॉलर यानी लगभग 90 लाख रुपए कर दिया।

इस वीजा की अवधि कितनी है- 3-3 साल के लिए दो बार जारी होता है। कुल अवधि 6 साल के बाद आवेदक चाहे तो ग्रीन कार्ड यानी नागरिकता से पहले की स्टेज के लिए आवेदन कर सकता है।

एच-1 बी पर ट्रम्प की कभी हां, कभी ना

ट्रम्प का एच-1 बी वीजा पर 9 साल में कभी हां, कभी ना वाला रवैया रहा है। पहले कार्यकाल में 2016 में ट्रम्प ने इस वीजा को अमेरिकी हितों के खिलाफ कहा था। 2019 में इस वीजा का एक्सटेंशन सस्पेंड किया। पिछले महीने ही यू-टर्न लेते हुए कहा- हमें टैलेंट की जरूरत है।

गोल्ड कार्ड में हमेशा रहने का अधिकार मिलेगा

ट्रम्प ने H-1B में बदलाव के अलावा 3 नए तरह के वीजा कार्ड लॉन्च किए थे। 'ट्रम्प गोल्ड कार्ड', 'ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड' और 'कॉर्पोरेट गोल्ड कार्ड' जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड (8.8 करोड़ कीमत) व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (हमेशा रहने) का अधिकार देगा।

टेक कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं

भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के ग्रेजुएट तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं।

कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा लोग यानी इंजीनियर, कोडर और छात्र एक्सपोर्ट करता है। अब फीस महंगी होने से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करेगा।


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दुबई में बुर्ज खलीफा के पास ईरान का हमला, चारों तरफ धुआं; हताहतों की खबर नहीं

ईरान-इजरायल युद्ध आज 14वें दिन में प्रवेश कर चुका है। इस बीच शुक्रवार को दुबई में तेज धमाकों की आवाज से पूरा शहर दहल उठा। धमाके की आवाज इतनी तेज थी कि आस-पास की इमारतें हिल गई। शहर के बीच काला धुआं छा गया।

इससे जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें घटना वाली बिल्डिंग के पीछे बुर्ज खलीफा साफ नजर आ रहा है।

दुबई की इमारत में धमाका

दुबई मीडिया कार्यालय ने कहा कि मध्य दुबई में एक इमारत के बाहरी हिस्से में धमाके की सूचना मिली। अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है।

दुबई की मुख्य सड़क शेख जायद रोड से सायरन की आवाजें लगातार सुनाई दे रही थीं। 


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समुद्र में बड़ा हमला: Iran ने सुसाइड बोट से निशाना बनाया अमेरिकी तेल टैंकर, भारतीय नागरिक की मौत

Iran ने अमेरिकी स्वामित्व वाले तेल टैंकर MT Seaface Vishnu पर हमला किया है, जिसमें एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज पर मौजूद 15 भारतीय क्रू सदस्यों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया गया है।

बुधवार को Iraq के क्षेत्रीय जलक्षेत्र में Khor Al Zubair Port के पास इस टैंकर को निशाना बनाया गया। बताया गया है कि Iran की एक सुसाइड बोट ने जहाज पर हमला किया, जिससे टैंकर को भारी नुकसान पहुंचा।

इस हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई, हालांकि फिलहाल उसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। जहाज पर मौजूद बाकी 27 क्रू सदस्यों और कर्मचारियों को सुरक्षित बचाकर Basra ले जाया गया। कंपनी से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारतीय क्रू सदस्य की मौत की खबर से कंपनी बेहद दुखी है और इस घटना की कड़ी निंदा करती है।

कंपनी ने India सरकार से इस हमले पर सख्त प्रतिक्रिया देने और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच समुद्री मार्गों पर काम कर रहे क्रू सदस्यों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने की अपील की है।

वहीं शिपिंग ट्रैकिंग वेबसाइट VesselFinder के अनुसार MT Seaface Vishnu एक क्रूड ऑयल टैंकर है, जिसकी लंबाई करीब 228.6 मीटर और चौड़ाई 32.57 मीटर है। इस जहाज का निर्माण 2007 में हुआ था और यह फिलहाल Marshall Islands के झंडे के तहत संचालित किया जा रहा था। 


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