प्रीमियम पेट्रोल ₹2.35 प्रति लीटर तक महंगा हुआ

सरकारी तेल कंपनियों ने आज यानी 20 मार्च को स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल की कीमतें ₹2.09-₹2.35 प्रति लीटर तक बढ़ा दी है। भोपाल में इसकी कीमत बढ़कर करीब 117 रुपए पहुंच गई है। सामान्य पेट्रोल की कीमत में बदलाव नहीं हुआ है।

भारत पेट्रोलियम यानी BPCL प्रीमियम पेट्रोल को स्पीड नाम से बेचता है। वहीं हिंदुस्तान पेट्रोलियम यानी HPCL इसे पावर और इंडियन ऑइल यानी IOCL XP95 के नाम से इसे बेचता है। ये सामान्य पेट्रोल के मुकाबले करीब 10-12 रुपए महंगा होता है।

इसके अलावा इंडियन ऑयल ने अपने इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमत में भी 25% की बढ़ोतरी की है। इसके दाम ₹87.67 प्रति लीटर से बढ़कर अब ₹109.59 प्रति लीटर हो गए हैं। औद्योगिक डीजल के खरीदारों में रेलवे, रोडवेज बसें, बड़ी फैक्ट्रियां, अस्पताल और बड़े मॉल शामिल हैं। तेल कंपनियां ये डीजल टैंकरों के जरिए सीधे इन संस्थानों के निजी स्टोरेज टैंकों में भेजती हैं।

सामान्य और प्रीमियम पेट्रोल में ऑक्टेन वैल्यू का अंतर

सामान्य और प्रीमियम पेट्रोल में मुख्य अंतर इनके ऑक्टेन नंबर का होता है। प्रीमियम पेट्रोल का ऑक्टेन लेवल ज्यादा होता है जो इंजन को 'नॉकिंग' (झटके) से बचाकर बेहतर परफॉर्मेंस और लंबी लाइफ देता है। प्रीमियम पेट्रोल के दाम इसलिए ज्यादा होते हैं क्योंकि इसकी रिफाइनिंग प्रोसेस महंगी है और इसे बनाने के लिए खास 'एडिटिव्स' का इस्तेमाल होता हैं।

सामान्य पेट्रोल: इसका ऑक्टेन नंबर आमतौर पर 91 होता है। यह ज्यादातर कारों और बाइक्स के इंजन के लिए स्टैंडर्ड फ्यूल है।

प्रीमियम पेट्रोल: इसका ऑक्टेन नंबर 95 से 100 के बीच होता है। जैसे इंडियन ऑयल का 'XP95' 95 ऑक्टेन का है।

प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में क्यों हुई बढ़ोतरी?

प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में इजाफे के पीछे मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और प्रीमियम फ्यूल में मिलाए जाने वाले एडिटिव्स की लागत बढ़ना माना जा रहा है। सामान्य पेट्रोल के मुकाबले यह पहले से ही 5 से 10 रुपए महंगा था।

पेट्रोल की कीमतों में यह बढ़ोतरी कच्चा तेल महंगा होने और प्रीमियम फ्यूल में मिलाए जाने वाले एडिटिव्स की लागत बढ़ने को माना जा रहा है। ईरान जंग की वजह से क्रूड ऑयल के इंडियन बास्केट के दाम 70 डॉलर से बढ़कर 156 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गए हैं।

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि क्रूड की कीमतें बढ़ने से तेल कंपनियां दबाव में थीं। इसलिए कंपनियों ने घाटे की भरपाई के लिए यह कदम उठाया है। अगर कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो सामान्य पेट्रोल-डीजल की कीमतें भी बढ़ाई जा सकती हैं।

प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री कुल पेट्रोल का केवल 3-4%

प्रीमियम फ्यूल की बिक्री कुल पेट्रोल बिक्री का एक छोटा हिस्सा है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा कि प्रीमियम कैटेगरी के पेट्रोल में बढ़ोतरी हुई है, लेकिन यह बेचे जाने वाले कुल पेट्रोल का केवल 3-4% ही है।

क्या आपकी गाड़ी के लिए प्रीमियम पेट्रोल जरूरी है?

नॉर्मल कार/बाइक: अगर आपकी गाड़ी 100cc से 1500cc के बीच है और नॉर्मल इंजन वाली है, तो प्रीमियम पेट्रोल की जरूरत नहीं है।

लग्जरी/स्पोर्ट्स कार: अगर गाड़ी के मैनुअल में 95 ऑक्टेन फ्यूल लिखा है, तो प्रीमियम ही डालें वरना इंजन में 'नॉकिंग' की समस्या हो सकती है।

पुरानी गाड़ी: पुरानी गाड़ियों के इंजन की सफाई के लिए कभी-कभी प्रीमियम फ्यूल इस्तेमाल करना फायदेमंद हो सकता है।

इंडस्ट्रियल फ्यूल के दाम 25% बढ़े; ₹109.59 प्रति लीटर हुई कीमत

इंडियन ऑयल ने अपने इंडस्ट्रियल फ्यूल की कीमत में भी करीब ₹22 या 25% की बढ़ोतरी की है। इसके दाम ₹87.67 प्रति लीटर से बढ़कर अब ₹109.59 प्रति लीटर हो गए हैं।

इंडस्ट्रियल फ्यूल का उपयोग फैक्ट्रियों में बॉयलरों और पावर प्लांट्स में ऊर्जा पैदा करने के लिए किया जाता है। इसमें मुख्य रूप से फर्नेस ऑयल, लाइट डीजल ऑयल और हाई-स्पीड डीजल शामिल हैं। ये मशीनों को चलाने, धातुओं को पिघलाने और औद्योगिक हीटिंग के काम आते हैं।


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एयरलाइंस बढ़ा सकती हैं हवाई किराया, यात्रियों पर बढ़ेगा बोझ

इंडिगो, एअर इंडिया और स्पाइस जेट ने फ्लाइट्स की 60% सीटों पर एक्स्ट्रा चार्ज न वसूलने के सरकार के फैसले विरोध किया है। एयरलाइंस का कहना है कि इस कदम से उन्हें अपनी खोई हुई कमाई की भरपाई के लिए हवाई किराया बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा।

तीनों एयरलाइंस का प्रतिनिधित्व करने वाली फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस (FIA) ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से इस फैसले को वापस लेने का आग्रह किया है। फेडरेशन ने कहा...

इस निर्देश से एयरलाइंस की वित्तीय स्थिति काफी प्रभावित होगी। इसके परिणामस्वरूप सभी यात्रियों को, जिनमें वे लोग भी शामिल हैं, जो शायद पहले से सीटें नहीं चुनना चाहते, उन्हें भी अधिक किराया देना पड़ेगा।

दरअसल, एविएशन मिनिस्ट्री ने बुधवार को भारत में हवाई यात्रा को ज्यादा सुविधाजनक बनाने के लिए नए नियम जारी किए थे। नए आदेश के मुताबिक एयरलाइंस की हर फ्लाइट में कम से कम 60% सीटें बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के बुक होंगी। ये निर्देश घरेलू फ्लाइट्स पर लागू होंगे।

फेडरेशन ऑफ इंडियन एयरलाइंस के 4 पॉइंट

एयरलाइंस के लिए सीट चुनने का शुल्क कमाई का एक वैध (सही) तरीका है। एयरलाइंस बहुत कम मुनाफे पर काम करती हैं, इसलिए उन्हें अतिरिक्त सेवाओं (जैसे सीट चयन) से कमाई करनी पड़ती है।

ईंधन, रखरखाव और एयरपोर्ट शुल्क जैसे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं। एयरपोर्ट्स इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) के नियमों के कारण एयरपोर्ट की लागत हर साल बढ़ती है, जिससे एयरलाइंस पर और दबाव पड़ता है।

अगर सीट चयन शुल्क पर रोक लगाई गई तो एयरलाइंस की कमाई कम हो जाएगी और उनका कामकाज प्रभावित होगा। इससे बाजार के अनुसार कीमत तय करने की आजादी कम हो जाएगी।

मंत्रालय ने यह फैसला लेने से पहले एयरलाइंस या अन्य संबंधित पक्षों से सलाह नहीं ली। इस तरह का फैसला एयरलाइंस की कमाई में बड़ा नुकसान कर सकता है।

अभी 20% सीटें ही बिना एक्स्ट्रा चार्ज बुक होती हैं

मौजूदा नियमों में पैसेंजर्स के लिए 20% सीटें ही बिना एक्स्ट्रा चार्ज दिए बुक की जा सकती हैं, जबकि बाकी सीटों के लिए भुगतान करना पड़ता है।

ये कदम इसलिए उठाया गया, क्योंकि एयरलाइंस सीट चुनने समेत कई सर्विसेस के लिए बहुता ज्यादा शुल्क वसूल रही हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी एयरलाइंस पंसद की सीटें चुनने पर 500 से 3000 रुपए तक एक्स्ट्रा चार्ज करती हैं।

इसके अलावा एक ही PNR (बुकिंग रेफरेंस) पर यात्रा करने वाले यात्रियों को एक साथ बिठाया जाएगा या उन्हें आस-पास की सीटें दी जाएंगी।

एडिशनल चार्जेस को 5 सवाल-जवाब में समझिए

सवाल: क्या अब सीट चुनने के लिए ज्यादा पैसे देने होंगे?

जवाब: नहीं, अब फ्लाइट की कम से कम 60% सीटें फ्री होंगी, यानी आपको हर बार सीट के लिए अतिरिक्त पैसे नहीं देने पड़ेंगे।

सवाल: क्या परिवार या साथ यात्रा करने वाले लोग अलग-अलग बैठेंगे

जवाब: नहीं, अगर आपकी बुकिंग एक ही PNR पर है, तो आपको साथ या पास-पास सीट दी जाएगी।

सवाल: क्या खेल का सामान या म्यूजिकल इंस्ट्रूमेंट ले जाना आसान होगा?

जवाब: हां, अब इसके लिए स्पष्ट और आसान नियम बनाए जाएंगे, जिससे आपको पहले से पता रहेगा क्या करना है।

सवाल: क्या पालतू जानवर (pet) साथ ले जा सकते हैं?

जवाब: हां, लेकिन नियम के साथ। एयरलाइंस को इसके लिए साफ पॉलिसी बतानी होगी, ताकि कोई कन्फ्यूजन न रहे।

सवाल: अगर फ्लाइट लेट या कैंसिल हो जाए तो क्या मिलेगा?

जवाब: आपको अधिकार मिलेंगे, जैसे- रिफंड, दूसरी फ्लाइट या वेटिंग रूम, जो नियम में तय है।

सवाल: मुझे अपने अधिकार कैसे पता चलेंगे?

जवाब: अब आसानी से एयरलाइंस को वेबसाइट, एप और एयरपोर्ट पर स्पष्ट जानकारी दिखानी होगी।

'प्रेफर्ड सीट' के नाम पर एक्स्ट्रा चार्ज नहीं ले सकेंगी एयरलाइंस

अक्सर देखा जाता है कि टिकट बुकिंग के बाद जब यात्री वेब चेक-इन करते हैं, तो उन्हें फ्री सीट के नाम पर केवल 20% ऑप्शन ही मिलते थे। बाकी सीटों के लिए कंपनियां 'प्रेफर्ड सीट' के नाम पर भारी वसूली करती थीं। DGCA के नए आदेश के मुताबिक, अब हर फ्लाइट में 60% सीटें ऐसी होनी चाहिए, जिन्हें यात्री बिना किसी एक्स्ट्रा चार्ज के चुन सकें।


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सलमान खान की फिल्म मातृभूमि की रिलीज टली

सलमान खान की फिल्म 'मातृभूमि' की रिलीज डेट फिलहाल टाल दी गई है और स्क्रिप्ट में कुछ बदलावों के कारण फिल्म आगे बढ़ाई गई है।

ऐसा दावा इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट में किया गया है। देरी की एक बड़ी वजह एक्टर-सिंगर प्रशांत तमांग का अचानक निधन भी बताई गई है।

हालांकि, अभी तक मेकर्स ने आधिकारिक तौर पर फिल्म की रिलीज डेट में कोई बदलाव नहीं किया है। बता दें कि फिल्म की रिलीज 17 अप्रैल को तय की गई थी।

रिपोर्ट में फिल्म से जुड़े एक सूत्र के हवाले से बताया गया कि इंडियन आइडल 3 के विनर और एक्टर प्रशांत तमांग को मेन विलेन के रोल के लिए साइन किया गया था और उन्होंने कई अहम सीन की शूटिंग भी पूरी कर ली थी। हालांकि, इस साल जनवरी में उनके निधन से पहले कुछ अहम सीन की शूटिंग बाकी थी।

सूत्र ने बताया, 'टीम के कुछ शेड्यूल तय थे, जिनमें प्रशांत को बेहद अहम सीन शूट करने थे। उनके जाने के बाद टीम गहरे संकट में है।'

हालांकि, मेकर्स ने शुरू में उनके सीन रीशूट करने के बारे में सोचा था, लेकिन फिलहाल यह मुमकिन नहीं लग रहा है। सूत्र ने कहा, 'क्लोज-अप शॉट्स मैनेज किए जा सकते हैं, लेकिन वह एक बड़े एक्शन सीक्वेंस का भी हिस्सा थे। यह न सिर्फ आर्थिक रूप से मुश्किल होगा बल्कि लॉजिस्टिक तौर पर भी मुश्किल होगा।'

सलमान की डेट्स भी उपलब्ध नहीं हैं

इसके अलावा सूत्र ने बताया कि सलमान खान की डेट्स उपलब्ध नहीं हैं और उनके लुक की कंटिन्यूटी भी मुश्किलें बढ़ा रही हैं, जिससे टीम के लिए हालात और ज्यादा चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं।

एक समय पर, टीम या तो इस रोल के लिए किसी दूसरे एक्टर को कास्ट करने पर विचार कर रही थी या फिर AI और VFX का इस्तेमाल करके बाकी सीन में प्रशांत का चेहरा जोड़ने पर। हालांकि, इसके लिए उनके परिवार की मंजूरी जरूरी होगी।

सूत्र ने आगे बताया, 'इस महीने के आखिर तक फैसला हो जाएगा, क्योंकि फिल्म को पूरा करना और पोस्ट-प्रोडक्शन शुरू करना जरूरी है। रिलीज डेट अभी तय नहीं हुई है, लेकिन सब्जेक्ट को देखते हुए, इसे स्वतंत्रता दिवस पर रिलीज किया जा सकता है।'

बता दें कि पहले इस फिल्म का नाम 'बैटल ऑफ गलवान' था, जिसे अब बदलकर 'मातृभूमि: मे वॉर रेस्ट इन पीस' कर दिया गया है। यह बदलाव फिल्म की कहानी के गहरे जज्बात और जंग के बीच इंसानियत के संदेश को दर्शाने के लिए किया गया है। फिल्म को सलमान खान फिल्म्स के बैनर तले सलमा खान ने प्रोड्यूस किया है, जबकि अपूर्व लाखिया इसके डायरेक्टर हैं।


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सोना ₹1.47 लाख पहुंचा, इस हफ्ते ₹11 हजार तक हुआ सस्ता

इस हफ्ते सोने-चांदी के दाम में गिरावट रही। सोना हफ्तेभर में 11 हजार रुपए गिरकर 1.47 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया। इससे पहले ये बीते हफ्ते यानी 13 मार्च को 1.58 लाख रुपए पर था।

वहीं, चांदी 2.60 लाख किलो से गिरकर 2.32 लाख रुपए पर पहुंच गई है। यानी इसकी कीमत 28 हजार रुपए कम हुई।

अमेरिका-इजराइल की ईरान से चल रही जंग की वजह से निवेशक अपनी 'गोल्ड होल्डिंग्स' बेचकर कैश (डॉलर) इकट्ठा कर रहे हैं, ताकि बाजार की अस्थिरता से निपट सकें। इससे डॉलर डिमांड बढ़ रही है और सोने-चांदी के दाम गिर रहे हैं।

अलग-अलग शहरों में सोने के दाम अलग होने की 4 वजहें

ट्रांसपोर्टेशन और सिक्योरिटी: सोना एक शहर से दूसरे शहर ले जाने में ईंधन और भारी सुरक्षा का खर्च आता है। आयात केंद्रों से दूरी बढ़ने पर ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय दाम बढ़ जाते हैं।

खरीदारी की मात्रा : दक्षिण भारत जैसे इलाकों में खपत ज्यादा (करीब 40%) होने के कारण ज्वेलर्स भारी मात्रा में सोना खरीदते हैं। इससे मिलने वाली छूट का फायदा ग्राहकों को कम दाम के रूप में मिलता है।

लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: हर राज्य और शहर के अपने ज्वेलरी एसोसिएशन (जैसे तमिलनाडु में मद्रास ज्वेलर्स एसोसिएशन) होते हैं। ये संगठन स्थानीय मांग और सप्लाई के आधार पर अपने इलाके के लिए सोने का रेट तय करते हैं।

पुराना स्टॉक और खरीद मूल्य: ज्वेलर्स ने अपना स्टॉक किस रेट पर खरीदा है, यह भी मायने रखता है। जिन ज्वेलर्स के पास पुराने और सस्ते रेट पर खरीदा हुआ स्टॉक होता है, वे ग्राहकों से कम कीमत वसूल सकते हैं।

ऑलटाइम हाई से 1.53 लाख रुपए गिरी चांदी

इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 28,903 रुपए सस्ता हो चुका है।

वहीं, चांदी की कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए के ऑलटाइम हाई पर पहुंच गई थी। तब से अब तक 50 दिन में चांदी 1.53 लाख रुपए सस्ती हो गई है।

ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान

1. सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें: हमेशा ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) का हॉलमार्क लगा हुआ सर्टिफाइड गोल्ड ही खरीदें। ये नंबर अल्फान्यूमेरिक यानी कुछ इस तरह से हो सकता है- AZ4524। हॉलमार्किंग से पता चलता है कि सोना कितने कैरेट का है।

2. कीमत क्रॉस चेक करें: सोने का सही वजन और खरीदने के दिन उसकी कीमत कई सोर्सेज (जैसे इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन की वेबसाइट) से क्रॉस चेक करें। सोने का भाव 24 कैरेट, 22 कैरेट और 18 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग होता है।


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बंगाल-ओडिशा में आज आंधी-बारिश का अलर्ट, 80 किमी/घंटा की रफ्तार से चलेंगी तेज हवाएं

मार्च का पहला पखवाड़ा सूखा रहा, कई राज्यों में लू चली और तापमान 42 डिग्री तक पहुंचा। लेकिन दूसरे पखवाड़े में पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से मौसम पलट गया।

देशभर में कई सिस्टम बनने से पहाड़ों पर बर्फबारी और मैदानी इलाकों में बारिश-ओले गिर रहे हैं। जिससे तापमान गिरकर 20 डिग्री रह गया है।

मौसम विभाग के मुताबिक पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और यूपी में शनिवार सुबह से कोहरा छाया रहा। तापमान भी 10°C तक गिर गया।

शनिवार को देश के पूर्वी, मध्य और पूर्वोत्तर हिस्सों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी भी दी है। इनमें ओडिशा-बंगाल और सिक्किम में भारी बारिश और ओले गिरने का ऑरेंज अलर्ट है।

गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल के कुछ हिस्सों में 80kmph की रफ्तार से आंधी-तूफान की संभावना है। वहीं, ओडिशा में हवाओं की रफ्तार 70kmph हो सकती है। बारिश के साथ ओले भी गिर सकते हैं।

इस बीच, दक्षिणी राज्यों और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी छिटपुट बारिश होने की उम्मीद है, जबकि केरल, तटीय कर्नाटक और गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम बना रह सकता है।

अगले 7 दिन हीटवेव या लू का अलर्ट नहीं

मौसम विज्ञानी महेश पालावत के अनुसार, महीने के आखिर में एक और पश्चिमी विक्षोभ से बदलाव संभव है। हालांकि एक हफ्ते तक देश में कहीं भी हीटवेव चलने की कोई आशंका नहीं है।

उत्तर पश्चिम भारत यानी पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में दो दिनों में तापमान में 4-5 डिग्री गिरा है। अगले 2-3 दिन यह 2-3 डिग्री और गिरेगा।

मध्य भारत यानी मप्र, छग व महाराष्ट्र में भी अगले 2 दिन खास परिवर्तन नहीं होगा। गुजरात में अगले 3 दिनों में 5 डिग्री तक तापमान बढ़ेगा और फिर स्थिर बना रहेगा।

पूर्वी भारत यानी बिहार, झारखंड, प. बंगाल व ओडिशा में दो दिन 2-3 डिग्री कम होगा। उसके बाद 3 दिनों में 4-5 डिग्री बढ़ जाएगा।

हिमाचल में लगातार चौथे दिन बर्फबारी, 25 मार्च तक अलर्ट

हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले इलाकों में शुक्रवार को लगातार चौथे दिन भी बर्फबारी जारी रही। मनाली, लाहौल-स्पीति और आसपास के क्षेत्रों में रुक-रुक कर हो रही बर्फबारी से हालात सर्दियों जैसे बन गए हैं। अटल टनल, सोलंग और रोहतांग पास में 90 से 120 सेंटीमीटर तक बर्फ की मोटी परत जम गई है।

वहीं भुंतर-मनिकरण रोड लैंडस्लाइड के कारण बंद हो गई है और मनाली-रोहतांग रूट पर वाहनों की आवाजाही नेहरू कुंड तक सीमित कर दी गई है। लाहौल घाटी का संपर्क भी कट गया है और सड़कों को साफ करने का काम जारी है।

बर्फबारी से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। कल्पा में न्यूनतम तापमान 0 डिग्री सेल्सियस रहा, जबकि कुकुमसेरी 1.1 डिग्री और मनाली 3 डिग्री दर्ज किया गया। दूसरी ओर ऊना में अधिकतम तापमान 21.2 डिग्री सेल्सियस रहा।

क्या है पश्चिमी विक्षोभ

भूमध्य सागर, काला सागर और कैस्पियन सागर से वेस्टर्न जेट स्ट्रीम के साथ जो बादल उठते हैं, वे पश्चिम से पूर्व की तरफ आते हैं। जब वे पश्चिमी हिमालय तक पहुंचते हैं तो उन्हें रुकावट मिलती है और पहाड़ों पर बर्फबारी होती है। यदि उनका आकार बड़ा है तो मैदानी इलाकों में बारिश होती है। ऐसा अमूमन नवंबर से फरवरी के बीच और कभी-कभी मार्च में भी हो जाता है। यही वेस्टर्न डिस्टर्बेंस या पश्चिमी विक्षोभ कहलाता है।

अगले दो दिनों के दौरान मौसम का अनुमान

22 मार्च : पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 40-50 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से गरज-चमक और तेज हवाएं चल सकती हैं। छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और ओडिशा में आंधी-तूफान की संभावना है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और कर्नाटक में गरज-चमक की संभावना है। कर्नाटक, केरल, गोवा में गर्म और उमस भरा मौसम रहेगा।

23 मार्च : उत्तराखंड में गरज-चमक और तेज हवाएं चलने की संभावना है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 30-40 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से आंधी-तूफान संभव है। अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय और नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा में गरज-चमक हो सकती है।


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अमेरिका ने ईरान के तेल की खरीद पर 30 दिन की छूट दी

ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी है। ये छूट केवल समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकरों की खरीद के लिए है। अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा की। ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल के लिए है।

ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए ऐसा किया गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से क्रूड की कीमतें 110 डॉलर के पार निकल गई है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले ये 70 डॉलर के करीब थी।

स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दुनिया के लिए इस मौजूदा सप्लाई को अस्थायी रूप से खोलकर ग्लोबल मार्केट में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल तेजी से आएगा। इससे दुनियाभर में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और सप्लाई पर जो अस्थायी दबाव बना है, उसे कम करने में मदद मिलेगी।

रूसी तेल की खरीद पर दूसरी बार प्रतिबंध हटाया

ट्रम्प प्रशासन ने गुरुवार को एक नया 'जनरल लाइसेंस' जारी किया, जिसके तहत उन रूसी टैंकरों से तेल बेचने की इजाजत दी गई है जो 12 मार्च तक लोड हो चुके थे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के मुताबिक, यह छूट 11 अप्रैल 2026 तक लागू रहेगी।

नया लाइसेंस 12 मार्च को जारी किए गए पिछले 30 दिनों के 'सेंक्शंस वेवर' की जगह लेगा। पुराने लाइसेंस में कुछ तकनीकी स्पष्टता की कमी थी। नए लाइसेंस के जरिए उत्तर कोरिया, क्यूबा और क्रीमिया को इस छूट से बाहर कर दिया है।

युद्ध के कारण 120 डॉलर तक पहुंच गई थी तेल की कीमतें

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ब्रेंट क्रूड आज 112 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। बीते दिनों ये 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था।

तेल की कीमतों के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा।

दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी अपने निर्यात के लिए इसी पर निर्भर हैं। भारत अपनी जरूरत का 50% कच्चा तेल और 54% एलएनजी इसी रास्ते से मंगाता है। ईरान खुद इसी रूट से एक्सपोर्ट करता है।

ईरान पर प्रतिबंधों की शुरुआत 1979 में हुई थी

ईरान पर तेल प्रतिबंध मुख्य रूप से उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से लगाए गए थे। ईरान पर प्रतिबंधों की शुरुआत 1979 में हुई थी, जब तेहरान में अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को बंधक बना लिया गया था।

2015: ओबामा प्रशासन के दौरान ईरान के साथ परमाणु समझौता (JCPOA) हुआ था। इसके बदले में ईरान पर से तेल निर्यात करने के कलिए कई पाबंदियां हटा ली गई थीं।

2018: तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने परमाणु समझौते से बाहर निकलते हुए कड़े प्रतिबंध लगा दिए। ईरान की तेल की कमाई को 'जीरो' करने के लिए ऐसा किया गया।

अब नीचे सवाल-जवाब में इस फैसले की वजह और असर…

सवाल 1: अमेरिका ने अचानक ईरान पर लगे प्रतिबंधों में ढील क्यों दी?

जवाब: ईरान के साथ युद्ध शुरू हुए तीन हफ्ते हो चुके हैं। इस दौरान मिडिल-ईस्ट में तनाव और स्ट्रैट ऑफ होर्मुज के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप हो गई है।

कच्चे तेल की कीमतें 3.5 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस 'एनर्जी क्राइसिस' से निपटने के लिए ट्रम्प प्रशासन ने यह कदम उठाया है।

सवाल 2: क्या यह अमेरिका का ईरान के प्रति नरम रुख है?

जवाब: बिल्कुल नहीं। ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट का कहना है कि यह एक सोची-समझी रणनीति है। उन्होंने X पर लिखा, "हम तेहरान के खिलाफ ही ईरानी बैरल का इस्तेमाल कर रहे हैं ताकि कीमतें कम रखी जा सकें।" अमेरिका का तर्क है कि यह तेल वैसे भी चोरी-छिपे चीन को बेचा जाता, इससे बेहतर है कि इसे वियतनाम या थाईलैंड जैसे अमेरिकी सहयोगी देश खरीद लें।

सवाल 3: इस तेल की बिक्री से होने वाली कमाई का ईरान क्या करेगा?

जवाब: अमेरिका ने साफ किया है कि ईरान के लिए इस कमाई को हासिल करना बहुत मुश्किल होगा। बेसेंट के मुताबिक, अमेरिका अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग सिस्टम पर अपनी पकड़ बनाए रखेगा ताकि ईरान इस पैसे का इस्तेमाल न कर सके। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतें 33% तक बढ़ चुकी हैं, ऐसे में ईरान को कुछ न कुछ आर्थिक फायदा तो जरूर होगा।

सवाल 4: क्या 14 करोड़ बैरल तेल दुनिया की जरूरत के लिए काफी है?

जवाब: यूएस एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, 14 करोड़ बैरल तेल पूरी दुनिया की सिर्फ डेढ़ दिन की खपत के बराबर है। यूरेशिया ग्रुप के एनालिस्ट ग्रेगरी ब्रू का कहना है कि यह स्टॉक बहुत जल्द खत्म हो जाएगा। इसके बाद अमेरिका के पास या तो ईरान पर से पूरी तरह बैन हटाने का विकल्प बचेगा या फिर कोई और कड़ा रास्ता चुनना होगा।

सवाल 5: 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' क्या है और इसमें तेल का क्या रोल है?

जवाब: यह ट्रम्प प्रशासन का ईरान के खिलाफ सैन्य और आर्थिक अभियान है। एक तरफ अमेरिका ईरान के सैन्य ठिकानों को तबाह कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ वह नहीं चाहता कि इसकी वजह से वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा जाए। तेल की सप्लाई सुनिश्चित करना इस ऑपरेशन का एक अहम हिस्सा है ताकि अमेरिकी वोटर्स और सहयोगी देशों पर महंगाई का बोझ न पड़े।

सवाल 6: स्ट्रैट ऑफ होर्मुज को लेकर ट्रंप का क्या स्टैंड है?

जवाब: दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है, जिसे ईरान ने लगभग बंद कर रखा है। ट्रम्प ने इसे लेकर कहा कि एक समय के बाद यह अपने आप खुल जाएगा। वह फिलहाल सैन्य उद्देश्यों को पूरा करने पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं और तेल की कमी को अस्थायी दर्द मान रहे हैं।

सवाल 7: आगे क्या होगा? एक्सपर्ट्स की क्या राय है?

जवाब: विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका के पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं। पूर्व अधिकारी लैंडन डेरेंट्ज़ के मुताबिक, स्थिति बहुत गंभीर है। अब या तो अमेरिका को किसी भी तरह स्ट्रैट ऑफ होर्मुज खुलवाना होगा या फिर और भी गंभीर आर्थिक परिणामों के लिए तैयार रहना होगा।

नॉलेज बॉक्स: 'सेंक्शंस वेवर' क्या होता है?

जब एक देश दूसरे पर व्यापारिक प्रतिबंध लगाता है, तो कुछ खास स्थितियों में व्यापार जारी रखने के लिए जो कानूनी छूट दी जाती है, उसे 'वेवर' कहते हैं। अमेरिका अक्सर अपनी जरूरत और ग्लोबल मार्केट के संतुलन के लिए ऐसे अस्थायी वेवर जारी करता रहता है।

भारत पर असर: भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। अगर ग्लोबल मार्केट में 14 करोड़ बैरल एक्स्ट्रा तेल आता है, तो पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रह सकती हैं।


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60 साल में पहली बार अल-अक्सा मस्जिद ईद पर बंद

दुनियाभर में ईद का जश्न शुरू हो चुका है। मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच पिछले 22 दिनों से जंग चल रही है। ऐसे में 60 साल में पहली बार इजराइल के यरुशलम में अल-अक्सा मस्जिद को ईद की नमाज के लिए बंद कर दिया गया है।

1967 के अरब-इजराइल युद्ध के बाद पहली बार है, जब अल-अक्सा को पूरी तरह बंद किया गया है। यह मुसलमानों के लिए मक्का और मदीना के बाद तीसरा सबसे पवित्र स्थल है।

ईरान में शुक्रवार को ईद मनाया गया। इस मौके पर बाजार वीरान नजर आए। वहीं कतर, UAE और कुवैत जैसे खाड़ी देशों में आज ईद मनाया जा रहा है। जंग की वजह से इन देशों में खुले मैदानों में नमाज पढ़ने पर रोक लगा दी गई है।

यरुशलम में आम लोगों की एंट्री बंद

28 फरवरी से अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ शुरू हुए युद्ध के बाद, सुरक्षा कारणों से इजराइली अधिकारियों ने यरुशलम में आम लोगों की एंट्री बंद कर रखी है। सिर्फ वहां रहने वाले लोग या दुकानदार ही अंदर जा सकते हैं।

6 मार्च से वेस्टर्न वॉल, अल-अक्सा मस्जिद और चर्च ऑफ द होली सेपल्कर जैसे सभी धार्मिक स्थल बंद हैं। पूरे देश में भीड़ पर भी पाबंदी है। मस्जिद के अंदर 100 और बाहर 50 लोगों तक ही इकट्ठा होने की अनुमति है।

यरुशलम के पुराने शहर के गेट पर शुक्रवार को ईद-उल-फितर की नमाज के दौरान सैकड़ों मुस्लिम नमाजियों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। नमाजी ‘अल्लाहु अकबर’ और कलमा पढ़ते हुए गेट के अंदर जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने सैकड़ों लोगों को जबरदस्ती हटाया।

ईरान: इजराइली हमले में मारी गई बच्चों को श्रद्धांजलि

ईरान में इस बार ईद उल फितर का त्योहार जंग और तनाव के साये में मनाया गया। रमजान खत्म होने के बाद देशभर में लोगों ने मस्जिदों और धार्मिक स्थलों पर नमाज अदा की।

युद्ध और हमलों के कारण कई जगहों पर जश्न सादगी से मनाया गया। बाजारों में भी रौनक कम रही और कई दुकानें बंद दिखीं।

UAE: ईद के मौके पर चहल-पहल में कमी दिखी

UAE में ईद-उल-फितर के मौके पर शुक्रवार से सोमवार तक 4 दिन की छुट्टी का ऐलान किया गया है। पूरे देश में बाजार, मॉल और सार्वजनिक जगहों पर लाइटिंग और सजावट की गई और लोगों की अच्छी खासी भीड़ देखने को मिली। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था पहले से ज्यादा कड़ी कर दी गई है।

ईराक: लोगों ने खामेनेई को याद किया

ईराक में इस बार ईद उल फितर डर और तनाव के माहौल में मनाई जा रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर यहां के लोगों की भी जिंदगी पर हुआ है।

बाहर का माहौल पहले जैसा नहीं है। बड़े आयोजन और भीड़-भाड़ वाले जश्न अब कम हो गए हैं। लोग भीड़ से बच रहे हैं और बाहर निकलने में सावधानी बरत रहे हैं।

पहले जहां बच्चे मोहल्लों में घूमकर ईदी इकट्ठा करते थे, अब ऐसे नजारे कम दिखाई दे रहे हैं क्योंकि सुरक्षा चिंता ज्यादा है।

लेबनान: शेल्टर के पास घूमते दिखे लोग

लेबनान में ईद के मौके पर अलग-अलग माहौल है। उत्तरी लेबनान में जहां एक तरफ लोग ईद-उल-फितर की तैयारी कर रहे हैं, वहीं दक्षिण लेबनान में हजारों शरणार्थी अपने घरों से दूर रहकर ईद मना रहे हैं।

इजराइल ने ईरान पर हमला करने के बाद लेबनान के दक्षिणी शहरों में भी हमले तेज कर दिए हैं। अब तक यहां पर 1000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

ईद पर पाक-अफगान युद्ध 4 दिन के लिए रुका

पाकिस्तान और अफगानिस्तान ने ईद-उल-फितर के अवसर पर जंग में अस्थायी विराम की घोषणा की। जंग को 5 दिनों के लिए रोक दिया गया है। यह कदम सऊदी अरब, तुर्किए और कतर की अपीलों के बाद उठाया गया है।

सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार नेप कहा कि यह सीजफायर 18/19 मार्च की रात से 23/24 मार्च की रात तक लागू रहेगा। हालांकि, किसी भी सीमा पार हमले, ड्रोन हमले या पाकिस्तान में आतंकवादी घटना होने पर ऑपरेशन तुरंत फिर से शुरू कर दिया जाएगा।

ईद पर विशेष उड़ानें

जानकारी के मुताबिक एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और ओमान के लिए नियमित और विशेष उड़ानें संचालित करेंगी।

एयरलाइनों के मुताबिक, कुछ उड़ानें फिलहाल अस्थायी रूप से बंद हैं, लेकिन यात्रियों की सुविधा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जा रही है।

दोनों एयरलाइनों ने यह भी बताया कि जेद्दा (सऊदी अरब) और मस्कट (ओमान) के लिए नियमित उड़ानें जारी रहेंगी। इसमें भारत और जेद्दा के बीच करीब 16 उड़ानें शामिल हैं।

एयरलाइनों का कहना है कि हालात को देखते हुए आगे की योजना में जरूरत के अनुसार बदलाव किया जा सकता है।


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बिहार पंचायत चुनाव 2026: मल्टी पोस्ट ईवीएम से छह पदों पर एक साथ मतदान का बड़ा बदलाव

बिहार में होने वाले आगामी पंचायत चुनाव को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। संभावना है कि यह चुनाव नवंबर-दिसंबर में कराए जाएंगे। इस बार चुनाव प्रक्रिया में बड़ा बदलाव करते हुए पहली बार मल्टी पोस्ट ईवीएम का इस्तेमाल किया जाएगा।

राज्य निर्वाचन आयोग ने जिला निर्वाचन पदाधिकारी (डीआरओ) और अपर जिला निर्वाचन पदाधिकारी (एडीआरओ) की नियुक्ति कर दी है। साथ ही सभी जिलों को नई व्यवस्था के लिए निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

चुनाव के लिए हैदराबाद स्थित इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड से 32,200 कंट्रोल यूनिट (CU) और 1,93,200 बैलेट यूनिट (BU) खरीदी गई हैं। एक मल्टी पोस्ट ईवीएम सेट में एक कंट्रोल यूनिट के साथ छह बैलेट यूनिट जुड़े होते हैं।

सुरक्षित रखरखाव की व्यवस्था

आयोग ने सभी जिलों के प्रमंडलीय आयुक्तों को पत्र भेजकर इन मशीनों के सुरक्षित रखरखाव के लिए वेयरहाउस चिह्नित कर उसकी सूची उपलब्ध कराने को कहा है।

वेयरहाउस के लिए तय मानकों के अनुसार प्राथमिकता सरकारी भवनों को दी जाएगी। विशेष स्थिति में ही आयोग की अनुमति से लीज पर वेयरहाउस बनाया जा सकेगा, जिसकी अवधि कम से कम 15 वर्ष होगी।

खराब मशीनों के लिए अलग व्यवस्था

स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि ईवीएम स्टोरेज वाले वेयरहाउस में कोई अन्य सामग्री नहीं रखी जाएगी। साथ ही फर्स्ट लेवल चेकिंग के बाद खराब या डिफेक्टिव मशीनों के लिए अलग से व्यवस्था अनिवार्य होगी।

क्या है मल्टी पोस्ट ईवीएम?

मल्टी पोस्ट ईवीएम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके जरिए एक ही समय में छह पदों—ग्राम पंचायत सदस्य, मुखिया, पंच, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्य के लिए मतदान किया जा सकेगा। इससे चुनाव प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और सुविधाजनक हो जाएगी।

उन्नत तकनीक पर आधारित ईवीएम

दरअसल, यह उन्नत तकनीक पर आधारित ईवीएम है, जिसे खास तौर पर त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए विकसित किया गया है। पारंपरिक ईवीएम में एक बार में केवल एक पद के लिए वोट डाला जाता है, जबकि मल्टी पोस्ट ईवीएम में मतदाता एक ही बूथ पर सभी पदों के लिए क्रमवार मतदान कर सकता है।

होगी समय की बचत 

इस व्यवस्था से मतदाताओं को अलग-अलग कतार में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे समय की बचत होगी। वहीं चुनावी खर्च भी कम होगा और मतगणना की प्रक्रिया पहले से अधिक तेज और सटीक हो जाएगी।

इसके अलावा, कागजी मतपत्रों में होने वाली अमान्य वोट की समस्या भी खत्म हो जाएगी। प्रशासन का मानना है कि इस नई प्रणाली से चुनाव प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी।


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भारत में प्रीमियम पेट्रोल महंगा, कीमतों में ₹2 से ज्यादा की बढ़ोतरी शुरू

भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हो गई है। तेल कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार, स्पीड और पावर जैसे प्रीमियम पेट्रोल ब्रांडों की कीमतों में ₹2.09 प्रति लीटर का इजाफा किया गया है। यह बढ़ोतरी अलग-अलग शहरों में लागू की गई है। संशोधित दरें 20 मार्च, 2026 से प्रभावी हुईं।

प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में दो रुपये से अधिक की बढ़ोतरी के बाद उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब इसकी कीमत 103.92 रुपये प्रति लीटर (Petrol Price Hike) हो गई है। वहीं, पुणे में प्रीमियम पेट्रोल की कीमत ₹113.77 हो गई है।

भले ही तेल कंपनियों ने प्रीमियम पेट्रोल की कीमतों में इजाफा कर दिया हो लेकिन अभी नॉर्मल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा नहीं किया गया है। वैश्विक स्तर पर ईरान में चल रहे संघर्ष की वजह से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा चुकी हैं। 

डीलरों के अनुसार, HPCL के 'पावर पेट्रोल' और IOCL के 'XP95' जैसे ब्रांडेड ईंधनों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है। प्रीमियम पेट्रोल का इस्तेमाल आमतौर पर बेहतर इंजन परफॉर्मेंस और ज्यादा माइलेज के लिए किया जाता है।

कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर

शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई, क्योंकि प्रमुख यूरोपीय देशों और जापान ने 'हॉर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) से जहाजों के सुरक्षित गुजरने के प्रयासों में शामिल होने की पेशकश की, और अमेरिका ने तेल की आपूर्ति बढ़ाने के लिए कदम उठाए। फिर भी कीमतें $100 के स्तर से ऊपर ही बनी रहीं।

फिर भी, इस हफ़्ते बेंचमार्क ब्रेंट में लगभग 5% की बढ़त होने की उम्मीद है, क्योंकि ईरान ने खाड़ी देशों में तेल और गैस सुविधाओं पर हमला किया, जिससे उत्पादन में कटौती करनी पड़ी।


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कुवैत की तेल रिफाइनरी पर ड्रोन हमला, कई यूनिट्स में भीषण आग लगी

मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम होने की बजाय लगातार बढ़ता ही जा रहा है। इस जंग में सबसे अधिक खाड़ी देश प्रभावित हैं। शुक्रवार सुबह कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने बताया कि आज सुबह मीना अल-अहमदी रिफाइनरी को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया, जिसके चलते कई यूनिट्स में आग लग गई।

कुवैत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन (KPC) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए पोस्ट में लिखा, "आज सुबह मीना अल-अहमदी रिफाइनरी को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया गया, जिससे कई यूनिट्स में आग लग गई और एहतियात के तौर पर सुविधा के कुछ हिस्सों को बंद करना पड़ा।

किसी के घायल होने की कोई खबर नहीं है, और आपातकालीन टीमें स्थापित सुरक्षा मानकों के अनुरूप स्थिति को काबू में करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही हैं।"

'अमेरिका को सैन्य अड्डे देना आक्रामकता का कृत्य है'

ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिटेन को चेतावनी दी है कि अमेरिका को सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति देना, इस संघर्ष में सीधे तौर पर शामिल होना माना जाएगा। ईरानी विदेश मंत्री ने UK के अपने समकक्ष के साथ फोन पर बातचीत के दौरान कहा कि 'अमेरिका को सैन्य अड्डे देना आक्रामकता का कृत्य है'।

खतरे में खाड़ी देश

बताते चले कि इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी जंग ने पूरे खाड़ी क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है। इससे पहले, बुधवार रात को इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला किया था, इसके जवाब में ईरान ने कतर के रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी पर हमला किया।

इसके बाद गुरुवार को CNN ने बताया कि एक ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल ने उत्तरी इजरायल में एक प्रमुख तेल रिफाइनरी परिसर पर हमला किया। ईरानी मिसाइल ने हाइफा तेल रिफाइनरी परिसर को निशाना बनाया।

अब बिल्कुल संयम नहीं बरतेंगे

वहीं ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि अगर ईरानी इंफ्रास्ट्रक्चर को फिर से निशाना बनाया गया, तो बिल्कुल भी संयम नहीं बरता जाएगा।" अराघची ने कहा कि इजरायल के हमले के जवाब में अभी तक ईरान ने अपनी शक्ति का सिर्फ एक छोटा हिस्सा इस्तेमाल किया था।


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